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Showing posts from May, 2021

वर्दी #हिफ़ाजय है ।।

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 इस फोटो को मैं कई सालों से इंटरनेट पर देख रहा हूँ , पुलिस को लेकर लोग बुरा भला कहते हैं , फिटनेस को लेकर मोटा गैंडा ठुल्ला कहते हैं , करप्शन को लेकर जमकर गालियाँ देते  हैं । अभी पिछली पोस्ट को मैंने सिर्फ हलके अंदाज़ में इसलिए पोस्ट किया था कि मित्रों के चेहरे पर एक मुस्कान आ जाये । लेकिन वहाँ भी मोटापे को लेकर खरी खोटी सुननी पड़ी । खैर मैंने सोचा आप सबको तस्वीर के दूसरे रुख से परिचय कराऊँ ।  पुलिसवाला प्रतिदिन कम कम 12 घण्टे की ड्यूटी करता है, न कोई रविवार न कोई छुट्टी , जिस दिन राष्ट्रीय छुट्टी होती है उस दिन वह सुबह 4 बजे जगकर अपनी वर्दी दुरुस्त करता है , जूता बेल्ट चमकाता है और जनता के सामने एक आदर्श बनने की कोशिश करता है । भाई साहब कभी इनकी यूनिफार्म  उतरवा कर देख लेना, 10 में से 4 कि बनियान फटी हुई होगी, मोज़े फटे हुए होंगे।   कोई भी सरकारी विभाग  रविवार : 52 द्वितीय शनिवार: 12  सरकारी छुट्टियां : 36 कुल मिलाकर एक साल में 100 छुट्टियाँ भाई साहब पुलिस वाला भी एक सरकारी कर्मचारी ही है , सैलरी भी किसी भी सरकारी कर्मचारी जितनी ही मिलती है  फि...

Maa माँ #Mother's Day

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  जिन बच्चों की माँएँ नहीं होतीं    उनकी रेलगाड़ियाँ कहाँ जाती हैं   धड़धड़ाती हुईं   सीटी बजाती हुईं   धुआँ उड़ाती हुईं   उनके इंतज़ार में शिद्दत से बिछी आँखों को   फिर वे कहाँ खोजने जाते हैं   आँचल का वह सिरा   उन हाथों का स्पर्श   उस अनंत नि:स्वार्थ प्रेम के बिना   वे कैसे जीते हैं   यह जानते हुए भी कि इस दुनिया में   उनसे सबसे ज़्यादा प्यार करने वाली आँखें नहीं रहीं  और दुनिया का सबसे कोमल हृदय   उनके लिए अब और नहीं धड़केगा।  जीवन भर  पहाड़-खाई-धूप-बारिश-ठंड झेलते हुए  जब बैलों का एक जोड़ा  अचानक किसी रोज़  आख़िरी बार आँख भर कर देखता है  और ऐसी जगह की यात्रा पर अकेला चल देता है  जहाँ हाँक भी नहीं पहुँचेगी  न फिर कभी लाख चाहतों के बाद भी  हो पाएगा एक दूसरे की हथेलियों का स्पर्श  उन आख़िरी पलों की पीड़ा  इनकी आत्माएँ कैसे सहती होंगी?  जिन बेटियों की माएँ नहीं होतीं  वे किन कंधों पर सिर रखकर रोती ...

"मानवता वाला कोरोना"

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 इस फोटो में दो गिद्ध है | एक सबको दिखाई दे रहा है, जिसका स्वभाव ही मरे जीव जंतुओं को खाना है, एक गिद्ध दिखाई नहीं दे रहा है | यह मरते हुए को देख रहा है, यह सक्षम है, यह मरने वाले को बचा सकता है, लेकिन यह उसके मरने के इंतजार में है | मरते ही गिद्ध द्वारा नोचते बच्चे का फोटो उसे लेना है |                  कुछ ऐसा ही मंजर दिखाई दे रहा है | आपदा में अवसर ढूंढते नर पिचाश...जब चारों ओर हाहाकार मचा है फिर भी अनैतिक तरीकों से अपनी कमाई में लगे हैं, अरे पैसा किसको अच्छा नहीं लगता,आपको कमाने से कौन रोकता है | लेकिन कालाबाजारी, आम वस्तुओं को चार से पांच गुना रेट में!!!! गरीब कहां जाएगा???????                      कोरोना के नाम पर आम व्यक्ति वैसे ही मरा जा रहा है, ऊपर से यह नर पिचाश अस्पताल गला ही दबा रहे है( लूटना तो अब बहुत छोटा शब्द रह गया है)अपने परिजन को खोने के डर से आम आदमी अपना सब कुछ दांव लगा रहा है |               पिछले बारह तेरह दिन से शाम होते होते...

सिस्टम चुस्त,सरकार मस्त

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1 मई "मजदूर दिवस की हार्दिक बधाई" बढ़ता रोग,बिलखते लोग, न दवा न इलाज न ऑक्सीजन न इंजेक्शन कुछ भी नही फिर भी अपना देश भारत महान है । हमारी राजनीतिक विचारधारा महान है ।हमारी राष्ट्रवादिता महान है और इन सब से भी परे महान है हमारे राजनीतिक आका, जिन्होंने कोरोना की पीक शुरू होने से पहले ही अपने रिलीफ फंड के द्वार खोल दिये है । धन्य है अपना देश   1 साल बाद इन नेताओं ने हमारे सिस्टम को इतना तैयार कर दिया कि इन्हें बस यह कहना बाकी रह गया कि " तुम जानो तुम्हारा काम" आज इन सबको कल 2 मई "चुनावी परिणाम" की चिंता है  तनिक यह तो शर्म कर लेते "तुम्हारी 2मई की चिंता न जाने कितने गरीबो की 2 जून की रोटी बर्बाद कर रही है ।"