"मानवता वाला कोरोना"
इस फोटो में दो गिद्ध है | एक सबको दिखाई दे रहा है, जिसका स्वभाव ही मरे जीव जंतुओं को खाना है, एक गिद्ध दिखाई नहीं दे रहा है | यह मरते हुए को देख रहा है, यह सक्षम है, यह मरने वाले को बचा सकता है, लेकिन यह उसके मरने के इंतजार में है | मरते ही गिद्ध द्वारा नोचते बच्चे का फोटो उसे लेना है |
कुछ ऐसा ही मंजर दिखाई दे रहा है | आपदा में अवसर ढूंढते नर पिचाश...जब चारों ओर हाहाकार मचा है फिर भी अनैतिक तरीकों से अपनी कमाई में लगे हैं, अरे पैसा किसको अच्छा नहीं लगता,आपको कमाने से कौन रोकता है | लेकिन कालाबाजारी, आम वस्तुओं को चार से पांच गुना रेट में!!!! गरीब कहां जाएगा???????
कोरोना के नाम पर आम व्यक्ति वैसे ही मरा जा रहा है, ऊपर से यह नर पिचाश अस्पताल गला ही दबा रहे है( लूटना तो अब बहुत छोटा शब्द रह गया है)अपने परिजन को खोने के डर से आम आदमी अपना सब कुछ दांव लगा रहा है |
पिछले बारह तेरह दिन से शाम होते होते दो से तीन जानकारों के दुखद निधन की खबर आती है | पहले दिन में ऑक्सीजन अथवा अस्पताल में भर्ती हेतु फोन आते थे, अब आधी रात्रि में भी आने लगे है | मेरे जैसे साधारण व्यक्ति के पास आते यह फोन साबित करते है कि मामला भयावह है |
क्या तुम इस काली कमाई को सहेज कर रख पाओगे????क्या यह तुम्हारे साथ चलेगी??? ईश्वर के घर देर है, अंधेर नहीं....नर पिचाश मत बनो...

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