Maa माँ #Mother's Day

 जिन बच्चों की माँएँ नहीं होतीं  

उनकी रेलगाड़ियाँ कहाँ जाती हैं  
धड़धड़ाती हुईं  
सीटी बजाती हुईं  
धुआँ उड़ाती हुईं  


उनके इंतज़ार में शिद्दत से बिछी आँखों को  
फिर वे कहाँ खोजने जाते हैं  
आँचल का वह सिरा  
उन हाथों का स्पर्श  
उस अनंत नि:स्वार्थ प्रेम के बिना  
वे कैसे जीते हैं  
यह जानते हुए भी कि इस दुनिया में  
उनसे सबसे ज़्यादा प्यार करने वाली आँखें नहीं रहीं 
और दुनिया का सबसे कोमल हृदय  
उनके लिए अब और नहीं धड़केगा। 

जीवन भर 
पहाड़-खाई-धूप-बारिश-ठंड झेलते हुए 
जब बैलों का एक जोड़ा 
अचानक किसी रोज़ 
आख़िरी बार आँख भर कर देखता है 
और ऐसी जगह की यात्रा पर अकेला चल देता है 
जहाँ हाँक भी नहीं पहुँचेगी 
न फिर कभी लाख चाहतों के बाद भी 
हो पाएगा एक दूसरे की हथेलियों का स्पर्श 
उन आख़िरी पलों की पीड़ा 
इनकी आत्माएँ कैसे सहती होंगी? 

जिन बेटियों की माएँ नहीं होतीं 
वे किन कंधों पर सिर रखकर रोती हैं 
उनका घर उनका आँगन उनका मायका 
कहाँ होता है फिर? 

Comments