दिल्ली हाईकोर्ट की भाषायी शालीनता का एक नमूना देखिए-
"भीख मांगें, उधार लें या चोरी करें । कहीं से भी ऑक्सीजन का इंतज़ाम करें ।"
कितना गिरेंगे न्यायाधीश की कुर्सी पर बैठ कर ??
आप क्या समझ रहे हैं सरकार प्रयास नहीं कर रही है ??
फिर भी आप कड़े निर्देश दे सकते थे । पर आप एक सरकार को चोरी करने के लिए कह रहे हैं ??
श्रीमान जी अपनी भाषा पर स्वयं स्व-संज्ञान ले कर खुद को ही जेल भेजने का आदेश कीजिए न !!
एक चुनी हुई सरकार को इस तरह दुत्कारने का अधिकार आपको किसने दिया ??
मैं बेशक किसी के समर्थक या विरोधी के रूप में नहीं कह रहा हूँ । पर विचार-विरोध होने के बावजूद एक सरकार के लिए ऐसी अशालीन भाषा से आप अपमानित नहीं कर सकते । मुझे लगता है कि इस भाषा से आप केवल सस्ती लोकप्रियता चाहते हैं ।
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